Monday, June 4, 2007

आरक्षण कि आग्-नागरिक युद्घ कि ओर बढ़ता हमारा देश महान.

जाती आधारित आरक्षण को लागू करने का परिणाम तो यही होना हेई हमारे कर्ण धार्र जितनी जल्दी समझ जाएँ उतना ही देश का भला होगा। पर उन्हें देश से क्या। देश जाये भाड़ में। उन्हें अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकनी हैं। लोगों को आपस में लडाना हेई एक दुसरे को मरने मारने पर उतारू करके देश में सिविल वार के हालात पडा करने हैं। फूट डालो और राज करो नियम का पालन करने वाले ये देसी अंग्रेज ज्यादा खतरनाक हैं। जनता सावधान हो जाये। अंग्रेजों ने देश को दो हिस्सों में बाँटा था ये देश को पता नहीं कितने हिस्सों में बाँट देंगे।ये भी पता नहीं चल पायेगा कौन दोस्त हेई कौन दुश्मन। हाँ इसका आधार रोज बरोज सिर्फ एक ही होगा और वह है स्वार्थ। इस लिए जो आज दोस्त है कल दुश्मन होगा और जो आज दुश्मन है कल दोस्त होगा।
इसका इलाज सिर्फ एक है जाती धर्म आदह्रित राजनीति छोड कर गरीब अमीर आधारित राजनीती करो।अरे तुम्हरे से अच्छे तो पुराने स्टाइल के डाकू अच्छे थे जो अमीरों को लूट कर गरीबों कि सहायता करते थे। उनसे कुछ सीख लो और अमीरों पर टेक्स लगाओ और गरीब कि सहायता करो। बस साड़ी जिन्दगी तुम राज करोगे। पर देश को तो बचा लोगे। पर तुमें शर्म लिहाज कुछ होगी तब ही मेरी बात मानोगे। अच्छा कहा सुना माफ़। में भी क्या पागल हूँ जो पत्थर से सिर मार रहा हूँ। यहाँ मेरी सुनाने वाला है कोई।

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1 Comments:

At June 4, 2007 at 6:26 PM , Blogger रवि रतलामी said...

हाँ, भई, हम सुन रहे हैं.

आपने विचारोत्तेजक लिखा है और प्रासंगिक लिखा है. :)

 

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